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वाच्य किसे कहते है ? वाच्य  की परिभाषा और भेद  उदहारण सहित - hindi grammar

वाच्य किसे कहते है ? वाच्य की परिभाषा और भेद उदहारण सहित - hindi grammar

वाच्य (Voice) की परिभाषा

वाच्य की परिभाषा और उदाहरण | वाच्य परिवर्तन की परिभाषा |  वाच्य का अर्थ
वाच्य  की परिभाषा और उदहारण

क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहा जाता हैं, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है। 
इनमें किसी के अनुसार क्रिया के पुरुष, वचन आदि आए हैं।

इस परिभाषा के अनुसार वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन चाहे तो कर्ता के अनुसार होंगे अथवा कर्म के अनुसार अथवा भाव के अनुसार।

वाच्य के प्रयोग

वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन तथा पुरुष का अध्ययन 'प्रयोग' कहलाता है। 
ऐसा देखा जाता है कि वाक्य की क्रिया का लिंग, वचन एवं पुरुष कभी कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होता है, तो कभी कर्म के लिंग-वचन-पुरुष के अनुसार, लेकिन कभी-कभी वाक्य की क्रिया कर्ता तथा कर्म के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्यपुरुष होती है; ये ही प्रयोग है।

प्रयोग के प्रकार

'प्रयोग' तीन प्रकार के होते हैं-
(क) कर्तरि प्रयोग 
(ख) कर्मणि प्रयोग 
(ग) भावे प्रयोग

(क) कर्तरि प्रयोग- 

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों तब कर्तरि प्रयोग होता है;
जैसे- मोहन अच्छी पुस्तकें पढता है।

(ख) कर्मणि प्रयोग- 

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों तब कर्मणि प्रयोग होता है
जैसे- सीता ने पत्र लिखा।

(ग) भावे प्रयोग- 

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता अथवा कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्य पुरुष हों तब भावे प्रयोग होता है;
जैसे- मुझसे चला नहीं जाता। सीता से रोया नहीं जाता।

वाच्य के भेद

उपर्युक्त प्रयोगों के अनुसार वाच्य के तीन भेद होते हैं-
(1) कर्तृवाच्य (Active Voice)
(2) कर्मवाच्य(Passive Voice)
(3) भाववाच्य(Impersonal Voice)

(1) कर्तृवाच्य (Active Voice)- 

क्रिया के उस रूपान्तर को कर्तृवाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में कर्ता की प्रधानता का बोध हो।
जैसे- राम पुरतक पढ़ता है, मैंने पुस्तक पढ़ी।

(2) कर्मवाच्य (Passive Voice)- 

क्रिया के उस रूपान्तर को कर्मवाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में कर्म की प्रधानता का बोध हो।
जैसे- पुस्तक पढ़ी जाती है; आम खाया जाता है।

यहाँ क्रियाएँ कर्ता के अनुसार रूपान्तररित न होकर कर्म के अनुसार परिवर्तित हुई हैं। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अँगरेजी की तरह हिन्दी में कर्ता के रहते हुए कर्मवाच्य का प्रयोग नहीं होता; जैसे- 'मैं दूध पीता हूँ' के स्थान पर 'मुझसे दूध पीया जाता है' लिखना गलत होगा। हाँ, निषेध के अर्थ में यह लिखा जा सकता है- मुझसे पत्र लिखा नहीं जाता; उससे पढ़ा नहीं जाता।

(3) भाववाच्य (Impersonal Voice)- 

क्रिया के उस रूपान्तर को भाववाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो।
जैसे- मोहन से टहला भी नहीं जाता। मुझसे उठा नहीं जाता। धूप में चला नहीं जाता।

टिप्पणी- यहाँ यह स्पष्ट है कि कर्तृवाच्य में क्रिया सकर्मक और अकर्मक दोनों हो सकती है, किन्तु कर्मवाच्य में केवल सकर्मक और भाववाच्य में अकर्मक होती हैं।

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